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वाल्मीकि रामायण 93.11

अद्य लोकास्त्रयः कृत्स्ना पृथिवी च सकानना।
एकेनेन्द्रजिता हीना शून्येव प्रतिभाति मे ।। ६.९३.११ ।।

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