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वाल्मीकि रामायण 92.26

ततः प्रकृतिमापन्नो हृतशल्यो गतव्यथः।
सौमित्रिर्मुदितस्तत्र क्षणेन विगतज्वरः ।। ६.९२.२६ ।।

पूरा अध्याय