ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 9292.18वाल्मीकि रामायण 92.18त्वया लक्ष्मण नाथेन सीता च पृथिवी च मे। न दुष्प्रापा हते त्वद्य शक्रजेतरि चाहवे ।। ६.९२.१८ ।।पिछलाअगलापूरा अध्याय