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वाल्मीकि रामायण 91.94

विभीषणो हनूमांश्च जाम्बवांश्चर्क्षयूथपः।
विजयेनाभिनन्दन्तस्तुष्टुवुश्चापि लक्ष्मणम् ।। ६.९१.९४ ।।

पूरा अध्याय