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वाल्मीकि रामायण 91.66

सुपत्रमनुवृत्ताङ्गं सुपर्वाणं सुसंस्थितम्।
सुवर्णविकृतं वीरः शरीरान्तकरं शरम् ।। ६.९१.६६ ।।

पूरा अध्याय