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वाल्मीकि रामायण 91.42

स हताश्वादवप्लुत्य रथान्निहतसारथेः।
रथशक्तिं महातेजाः पितृव्याय मुमोच ह ।। ६.९१.४२ ।।

पूरा अध्याय