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वाल्मीकि रामायण 91.22

स लक्ष्मणं समुद्दिश्य परं लाघवमास्थितः।
ववर्ष शरवर्षाणि वर्षाणीव पुरन्दरः ।। ६.९१.२२ ।।

पूरा अध्याय