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वाल्मीकि रामायण 91.12

सो ऽभिनिष्क्रम्य नगरादिन्द्रजित् परवीरहा।
आभ्ययाज्जवनैरश्वैर्लक्ष्मणं सविभीषणम् ।। ६.९१.१२ ।।

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