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वाल्मीकि रामायण 91.1

स हताश्वो महातेजा भूमौ तिष्ठन्निशाचरः।
इन्द्रजित् परमक्रुद्धः सम्प्रजज्वाल तेजसा ।। ६.९१.१ ।।

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