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वाल्मीकि रामायण 90.36

रुधिरौघमहानद्यः प्रावर्तन्त सहस्रशः।
क्रव्यादा दारुणा वाग्भिश्चिक्षिपुर्भीमनिस्वनम् ।। ६.९०.३६ ।।

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