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वाल्मीकि रामायण 90.13

अग्निकेतुश्च दुर्धर्षो रश्मिकेतुश्च वीर्यवान्।
विद्युज्जिह्वो द्विजिह्वश्च सूर्यशत्रुश्च राक्षसः ।। ६.९०.१३ ।।

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