ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 99.18वाल्मीकि रामायण 9.18यावत् सुघोरा महती दुर्धर्षा हरि वाहिनी । न अवस्कन्दति नो लंकाम् तावत् सीता प्रदीयताम् ॥६-९-१८॥पिछलाअगलापूरा अध्याय