ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 8989.38वाल्मीकि रामायण 89.38बाणजालैः शरीरस्थैरवगाढैस्तरस्विनौ। शुशुभाते महावीर्यो प्ररूढाविव पर्वतौ ।। ६.८९.३९ ।।पिछलाअगलापूरा अध्याय