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वाल्मीकि रामायण 89.36

चक्रुतुस्तुमुलं घोरं सन्निपातं मुहुर्मुहुः।
इन्द्रजिल्लक्ष्मणश्चैव परस्परवधैषिणौ ।। ६.८९.३७ ।।

पूरा अध्याय