Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 89.34

स बभूव रणो घोरस्तयोर्बाणमयश्चयः।
अग्निभ्यामिव दीप्ताभ्यां सत्रे कुशमयश्चयः ।। ६.८९.३५ ।।

पूरा अध्याय