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वाल्मीकि रामायण 89.32

ते गात्रयोर्निपतिता रुक्मपुङ्खाः शरा युधि।
असृङ्नद्धा विनिष्पत्य विविशुर्धरणीतलम् ।। ६.८९.३३ ।।

पूरा अध्याय