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वाल्मीकि रामायण 89.25

शरवर्षं ततो घोरं मुञ्चतोर्भीमनिस्वनम्।
सासारयोरिवाकाशे नीलयोः कालमेघयोः ।। ६.८९.२६ ।।

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