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वाल्मीकि रामायण 88.8

तीक्ष्णसायकनिर्भिन्नान् शूलशक्त्यष्टितोमरैः।
अद्य वो गमयिष्यामि सर्वानेव यमक्षयम् ।। ६.८८.८ ।।

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