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वाल्मीकि रामायण 88.40

अभिप्रवृद्धौ युधि युद्धकोविदौ शरासिचण्डौ शितशस्त्रधारिणौ।
अभीक्ष्णमाविव्यधतुर्महाबलौ महाहवे शम्बरवासवाविव ।। ६.८८.४० ।।

पूरा अध्याय