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वाल्मीकि रामायण 88.15

अन्तर्धानगतेनाजौ यस्त्वया ऽ ऽचरितस्तदा।
तस्कराचरितो मार्गो नैष वीरनिषेवितः ।। ६.८८.१५ ।।

पूरा अध्याय