ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 8787.14वाल्मीकि रामायण 87.14नैतच्छिथिलया बुद्ध्या त्वं वेत्सि महदन्तरम्। क्वच स्वजनसंवासः क्वच नीचपराश्रयः ।। ६.८७.१४ ।।पिछलाअगलापूरा अध्याय