ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 8787.1वाल्मीकि रामायण 87.1एवमुक्त्वा तु सौमित्रिं जातहर्षो विभीषणः। धनुष्पाणिनमादाय त्वरमाणो जगाम ह ।। ६.८७.१ ।।अगलापूरा अध्याय