ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 8686.32वाल्मीकि रामायण 86.32यः स वासवनिर्जेता रावणस्यात्मसम्भवः। स एष रथमास्थाय हनुमन्तं जिघांसति ।। ६.८६.३३ ।।पिछलाअगलापूरा अध्याय