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वाल्मीकि रामायण 85.26

अद्य मत्कार्मुकोन्मुक्ताः शरा निर्भिद्य रावणिम्।
लङ्कामभिपतिष्यन्ति हंसाः पुष्करिणीमिव ।। ६.८५.२६ ।।

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