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वाल्मीकि रामायण 85.24

राघवस्य वचः श्रुत्वा लक्ष्मणः सविभीषणः।
जाग्राह कार्मुकश्रेष्ठमत्यद्भुतपराक्रमः ।। ६.८५.२४ ।।

पूरा अध्याय