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वाल्मीकि रामायण 84.21

मनुजवर न कालविप्रकर्षो रिपुनिधनं प्रति यत् क्षमो ऽद्य कर्तुम्।
त्वमति सृज रिपोर्वधाय वाणीममररिपोर्मथने यथा महेन्द्रः ।। ६.८४.२१ ।।

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