ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 8484.15वाल्मीकि रामायण 84.15तेन मोहयता नूनमेषा माया प्रयोजिता। विघ्नमन्विच्छता तत्र वानराणां पराक्रमे ।। ६.८४.१५ ।।पिछलाअगलापूरा अध्याय