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वाल्मीकि रामायण 83.41

त्वयि प्रव्रजिते वीर गुरोश्च वचने स्थिते।
रक्षसा ऽपहृता भार्या प्राणैः प्रियतरा तव ।। ६.८३.४१ ।।

पूरा अध्याय