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वाल्मीकि रामायण 83.26

अथवा दुर्बलः क्लीबो बलं धर्मो ऽनुवर्तते।
दुर्बलो हृतमर्यादो न सेव्य इति मे मतिः ।। ६.८३.२६ ।।

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