ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 8383.17वाल्मीकि रामायण 83.17यद्यधर्मो भवेद्भूतो रावणो नरकं व्रजेत्। भवांश्च धर्मयुक्तो वै नैवं व्यसनमाप्नुयात् ।। ६.८३.१७ ।।पिछलाअगलापूरा अध्याय