ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 8383.12वाल्मीकि रामायण 83.12असिञ्चन् सलिलैश्चैनं पद्मोत्पलसुगन्धिभिः। प्रदहन्तमनासाद्यं सहसा ऽग्निमिवोच्छिखम् ।। ६.८३.१२ ।।पिछलाअगलापूरा अध्याय