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वाल्मीकि रामायण 82.27

यज्ञभूम्यां तु विधिवत् पावकस्तेन रक्षसा।
हूयमानः प्रजज्वाल मांसशोणितभुक् तदा ।। ६.८२.२७ ।।

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