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वाल्मीकि रामायण 82.16

वानरैस्तैर्महावीर्यैर्घोररूपा निशाचराः।
वीर्यादभिहता वृक्षैर्व्यवेष्टन्त रणाजिरे ।। ६.८२.१६ ।।

पूरा अध्याय