ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 8181.21वाल्मीकि रामायण 81.21नृशंसानार्य दुर्वृत्त क्षुद्र पापपराक्रम। अनार्यस्येदृशं कर्म घृणा ते नास्ति निर्घृण ।। ६.८१.२१ ।।पिछलाअगलापूरा अध्याय