Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 80.13

जाज्वल्यमानो वपुषा तपनीयपरिच्छदः।
मृगैश्चन्द्रार्धचन्द्रैश्च स रथः समलङ्कृतः ।। ६.८०.१३ ।।

पूरा अध्याय