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वाल्मीकि रामायण 77.20

स तदा ह्रियमाणो ऽपि कुम्भकर्णात्मजेन ह।
आजघानानिलसुतो वज्रकल्पेन मुष्टिना ।। ६.७७.२० ।।

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