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वाल्मीकि रामायण 76.91

मुष्टिना ऽभिहतस्तेन निपपाताशु राक्षसः।
लोहिताङ्ग इवाकाशाद्दीप्तरश्मिर्यदृच्छया ।। ६.७६.९२ ।।

पूरा अध्याय