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वाल्मीकि रामायण 76.85

ततः कुम्भः समुत्पत्य सुग्रीवमभिपत्य च।
आजघानोरसि क्रुद्धो वज्रवेगेन मुष्टिना ।। ६.७६.८६ ।।

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