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वाल्मीकि रामायण 76.69

निर्भिद्यमानः सहसा सहमानश्च तान् शरान्।
कुम्भस्य धनुराक्षिप्य बभञ्जेन्द्रधनुष्प्रभम् ।। ६.७६.७० ।।

पूरा अध्याय