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वाल्मीकि रामायण 76.57

रामस्तु व्यथितं श्रुत्वा वालिपुत्रं रणाजिरे।
व्यादिदेश हरिश्रेष्ठान् जाम्बवत्प्रमुखांस्ततः ।। ६.७६.५८ ।।

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