ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 7676.33वाल्मीकि रामायण 76.33द्विविदः शोणिताक्षं तु विददार नखैर्मुखे। निष्पिपेष च वगेन क्षितावाविध्य वीर्यवान् ।। ६.७६.३३ ।।पिछलाअगलापूरा अध्याय