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वाल्मीकि रामायण 76.18

ते तु वृक्षान् समादाय सम्प्रचिक्षिपुराहवे।
खड्गेन प्रतिचिच्छेद तान् प्रजङ्घो महाबलः ।। ६.७६.१८ ।।

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