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वाल्मीकि रामायण 75.70

विस्रस्तकेशवसनं विध्वस्तकवचध्वजम्।
बलं राक्षसमालम्ब्य वानराः पर्यवारयन् ।। ६.७५.७० ।।

पूरा अध्याय