ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 7575.33वाल्मीकि रामायण 75.33विशल्यौ तु महात्मानौ तावुभौ रामलक्ष्मणौ। असम्भ्रान्तौ जगृहतुस्तदोभे धनुषी वरे ।। ६.७५.३३ ।।पिछलाअगलापूरा अध्याय