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वाल्मीकि रामायण 75.29

सा बभूव मुहूर्तेन हरिभिर्दीपिता पुरी।
लोकस्यास्य क्षये घोरे प्रदीप्तेव वसुन्धरा ।। ६.७५.२९ ।।

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