ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 7575.26वाल्मीकि रामायण 75.26हस्त्यध्यक्षैर्गजैर्मुक्तैर्मुक्तैश्च तुरगैरपि। बभूव लङ्का लोकान्ते भ्रान्तग्राह इवार्णवः ।। ६.७५.२६ ।।पिछलाअगलापूरा अध्याय