ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 7575.21वाल्मीकि रामायण 75.21ज्वलनेन परीतानि तोरणानि चकाशिरे। विद्युद्भिरिव नद्धानि मेघजालानि धर्मगे ।। ६.७५.२१ ।।पिछलाअगलापूरा अध्याय