वाल्मीकि रामायण 74.49
स पुच्छमुद्यम्य भुजङ्गकल्पं विनम्य पृष्ठं श्रवणे निकुञ्ज्य।
विवृत्य वक्त्रं वडवामुखाभमापुप्लुवे व्योमनि चण्डवेगः ।। ६.७४.४९ ।।
स पुच्छमुद्यम्य भुजङ्गकल्पं विनम्य पृष्ठं श्रवणे निकुञ्ज्य।
विवृत्य वक्त्रं वडवामुखाभमापुप्लुवे व्योमनि चण्डवेगः ।। ६.७४.४९ ।।