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वाल्मीकि रामायण 74.46

पद्भ्यां तु शैलमापीड्य वडवामुखवन्मुखम्।
विवृत्योग्रं ननादोच्चैस्त्रासयन्निव राक्षसान् ।। ६.७४.४६ ।।

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