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वाल्मीकि रामायण 74.41

पृथिवीधरसङ्काशो विपीड्य धरणीधरम्।
पृथिवीं क्षोभयामास सार्णवां मारुतत्मजः ।। ६.७४.४१ ।।

पूरा अध्याय